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Vidhan Sabha
अध्याय ९ अविलम्बनीय लोक महत्व के विषयों पर थोड़े समय के लिये चर्चा
 

५२- चर्चा उठाने की सूचना-

अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा उठाने के इच्छुक कोई सदस्य उठाये जाने वाले विषय का स्पष्टतया तथा सुतथ्यतया उल्लेख कर प्रमुख सचिव को लिखित रूप में सूचना दे सकेंगेः

                                परन्तु सूचना के साथ एक व्याख्यात्मक टिप्पणी संलग्न होगी जिसमें विषय की चर्चा उठाने के कारण दिये जायेंगेः

                                और सूचना का समर्थन कम से कम दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर से होगा।

५३- अध्यक्ष ग्राह्यता का विनिश्चय करेंगे-

यदि अध्यक्ष का सूचना देने वाले सदस्य से और मंत्री से ऐसी जानकारी के मांगने के बाद जिसे वे आवश्यक समझें, समाधान हो जाये कि विषय अविलम्बनीय है तथा इतने महत्व का है कि सदन में किसी दिन शीघ्र ही उठाया जाना चाहिये तो वे सूचना गृहण कर सकेंगे और सदन नेता के परामर्श से उस विषय को चर्चार्थ लेने के लिये तिथि व समय निश्चित कर देंगे। वह तिथि को तथा सूचना के विषय को सदन में घोषित करेंगे और चर्चा के लिये उतने समय की अनुमति दें सकेंगे जितना कि परिस्थितियों में उचित समझें और जो ढाई घंटे से अधिक न होः

                                परन्तु ऐसे विषय पर चर्चा के लिये इससे पूर्व कोई अवसर अन्यथा उपलब्ध हो तो अध्यक्ष सूचना गृह ण करने से इन्कार कर सकेंगे।

५४-औपचारिक प्रस्ताव नहीं रखा जायेगा-

सदन के सामने न तो कोई औपचारिक प्रस्ताव होगा और न मतदान होगा। जिस सदस्य ने सूचना दी हो वे संक्षिप्त वक्तव्य दे सकेंगे और मंत्री संक्षेप में उत्तर देंगे। किसी अन्य सदस्य को भी चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी जा सकेगी। विषय पुरःस्थापित करने वाले सदस्य को उत्तर देने के लिये दूसरी बार बोलने की अनुज्ञा दी जा सकेगी और सम्बद्ध मंत्री का अंतिम कथन होने पर चर्चा समाप्त हो जायेगी।

५५- भाषणों के लिये समय-सीमा-

अध्यक्ष, यदि वे ठीक समझें भाषणों के लिये समय-सीमा विहित कर सकेंगे।

 

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