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Vidhan Sabha
अध्याय 7 प्रश्न

२६- प्रश्नों का विषय-

प्रश्न प्रशासन के ऐसे विषय से सम्बद्ध होना चाहिए जिसके लिये शासन उत्तरदायी है। उसका प्रयोजन लोक-महत्व के विषय में सूचना प्राप्त करना अथवा कार्यवाही का सुझाव देना होगा।

२७- प्रश्नों का वर्गीकरण-

प्रश्नों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से होगाः-

(क) अल्पसूचित प्रश्न,

(ख) तारांकित प्रश्न तथा

(ग) अतारांकित प्रश्न।

व्याख्या

(१)      अल्पसूचित प्रश्न का तात्पर्य ऐसे प्रश्न से है जो अविलम्बनीय लोक-महत्व के विषय से सम्बन्धित हो। इसका विभेद दो तारांक लगाकर किया जायेगा। दिये हुये उत्तर से उत्पन्न अनुपूरक प्रश्न उसके बारे में अध्यक्ष की अनुज्ञा से किये जा सकेंगे।

व्याख्या

(२)      ताराकिंत प्रश्न का तात्पर्य ऐसे प्रश्न से है जिस पर दिये हुये उत्तर से उत्पन्न अनुपूरक प्रश्न अध्यक्ष की अनुज्ञा से किये जा सकेंगे। एक तारांक लगाकर उसका विभेद किया जायेगा।

व्याख्या

(३)      अतारांकित प्रश्न से उस प्रश्न का तात्पर्य है जिसका लिखित उत्तर संबंधित सदस्य को दिया जाये और जिस पर अनुपूरक प्रश्न करने की अनुज्ञा न हो।

२८- प्रश्नों का रूप तथा विषय-

कोई ऐसा प्रश्न नहीं पूछा जा सकेगा जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा न करता हो अर्थात्:-

                  

(१)      उसमें कोई ऐसा नाम या कथन नहीं होगा जो प्रश्न को सुबोध बनाने के लिये सर्वथा आवश्यक न हो,

(२)      यदि उसमें सदस्य द्वारा कोई कथन दिया गया हो तो प्रश्नकर्ता सदस्य को उस विवरण की परिशुद्धता के लिये स्वयं उत्तरदायी होना पड़ेगा,

(३)     वह अत्यधिक लम्बा न होगा तथा उसमें प्रतर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक या अपेक्षात्मक पद अथवा मान-हानिकारक कथन नहीं होंगे,

(४)     वह राय प्रकट करने या विधि सम्बन्धी प्रश्न या किसी काल्पनिक प्रस्थापन के समाधान के लिये नहीं पूछा जायेगा,

(५)     उसमें किसी व्यक्ति के सरकारी अथवा सार्वजनिक पद के अतिरिक्त उसके चरित्र या आचरण का उल्लेख नहीं होगा तथा व्यक्तिगत प्रकरणों का निर्देश भी न होगा जब तक कि कोई सिद्धान्त का विषय अन्तर्निहित न हो,

(६)     उसमें ऐसे प्रश्नों की तत्वतः पुनरावृत्ति नहीं की जायेगी जिनके उत्तर उसी सत्र में पहले दिये जा चुके हों या जिनका उत्तर देने से इन्कार कर दिया गया हो,

(७)     उसमें ऐसी सूचना नहीं मांगी जायेगी जो प्राप्त दस्तावेजों अथवा सामान्य निर्देश ग्रन्थों में उपलब्ध हो,

(८)     उसमें किसी ऐसे विषय के संबंध में सूचना नहीं मांगी जायेगी जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय के विचाराधीन हो,

(९)     उसमें किसी न्यायाधीश या न्यायालय के, जिसको भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार हो, आचरण के विषय में किसी ऐसी बात का निर्देश नहीं होगा, जो उसके न्यायिक कृत्यों से सम्बद्ध हो,

(१०)  उसमें व्यक्तिगत रूप का दोषारोपण नहीं किया जायेगा और न वह दोषारोपण ध्वनित होगा,

(११)  उसमें सीमित महत्व का अस्पष्ट अथवा निरर्थक विषयों पर अथवा बहुत ब्योरे की जानकारी नहीं मांगी जायेगी,

(१२)  उसका स्थानीय निकायों अथवा, अन्य अर्ध-स्वायत्त निकायों के दैनिक प्रशासन से कोई संबंध नहीं होगा। किन्तु अध्यक्ष ऐसों प्रश्नों को स्वीकृत कर सकेंगे जो उनके और शासन के संबंध में उत्पन्न होते हों या जो विधि या नियमों के भंग होने से सम्बद्ध हों या सार्वजनिक हित के महत्वपूर्ण विषयों से सम्बन्ध रखते हों,

(१३)  उसमें वर्तमान सत्र में हुए वाद-विवाद का निर्देश नहीं होगा,

(१४)  वह किसी सदन के विनिश्चयों की आलोचना न करेगा,

(१५)  उसमें ऐसे विषयों के संबंध में सूचना नहीं मांगी जायेगी, जो गोपनीय प्रकृति के हों, जैसे मंत्रि-परिषद् के विनिश्चय अथवा कार्यवाहियां,विधि अधिकारियों द्वारा राज्यपाल को दी गयी मंत्रणा तथा अन्य तत्सम विषय,

(१६)  वह किसी समिति के समक्ष विषयों से अथवा समिति के सभापति अथवा सदन के प्राधिकारियों के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत विषयों से सम्बद्ध नहीं होगा,

(१७)  उसका सम्बन्ध किसी असरकारी व्यक्ति अथवा असरकारी निकाय द्वारा दिये गये किसी वक्तव्य से न होगा,

(१८)  उसमें उन व्यक्तियों के चरित्र अथवा आचरण पर आक्षेप नहीं होगा जिनके आचरण पर मूल प्रस्ताव के द्वारा ही आपत्ति की जा सकती हो,

(१९)  उसमें ऐसी नीति के, जो इतनी विस्तीर्ण हो कि वह प्रश्न के उत्तर की परिधि के भीतर न आ सके, प्रश्न नहीं उठाये जायेंगे,

(२०)  उसमें ऐसे विषयों के बारे में नहीं पूछा जायेगा जो कोई न्यायिक या अर्धन्य़ाय़िक कृत्य करने वाले किसी संविहित न्यायाधिकरण या संविहित प्राधिकारी के या किसी विषय की जांच या अनुसंधान करने के लिये नियुक्त किसी आयोग या जांच न्यायालय के सामने विचाराधीन होः

                        किन्तु यदि उससे न्यायाधिकरण, संविहित प्राधिकारी, आयोग या जांच न्यायालय द्वारा उस विषय के विचार किये जाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका न हो तो उसमें जांच की प्रक्रिया या व्याप्ति या प्रक्रम से संबंधित विषयों की ओर निर्देश किया जा सकेगा।

२९- अल्पसूचित प्रश्न-

(१)      जब कोई सदस्य अल्पसूचित प्रश्न पूछना चाहें तो वे सत्र आहूत हो जाने के बाद ऐसे प्रश्नों की लिखित सूचना न्यूनतम तीन दिन पूर्व प्रमुख सचिव को देंगे और प्रमुख सचिव साधारणतया प्रश्न को अल्पसूचित प्रश्न के रूप में ग्राह्यता पर उसकी प्राप्ति के यथासंभव 24 घण्टे के भीतर अध्यक्ष की आज्ञा प्राप्त करेंगे।

(२)      अध्यक्ष की आज्ञा प्राप्त हो जाने के उपरान्त प्रश्न की एक प्रतिलिपि संबंधित मंत्री को इस निवेदन के साथ भेज दी जायेगी कि वह प्रमुख सचिव को सूचित करें कि क्या वह प्रश्न का उत्तर अल्पसूचित प्रश्न के रूप में देने की स्थिति में है।

(३)     यदि मंत्री अल्पसूचना पर उत्तर देने के लिये सहमत हों तो वह तत्काल या तदुपरान्त इतने शीध्र कार्य-सूची में रख दिया जायेगा जैसा कि अध्यक्ष निर्देश  देः

                        परन्तु किसी एक दिन की कार्य-सूची में २ से अधिक अल्पसूचित प्रश्न नहीं रखे जायेंगे।

(४)     (४) यदि सम्बद्ध मंत्री अल्पसूचना पर उत्तर देने की स्थिति में न हो और अध्यक्ष की यह राय हो कि वह पर्याप्त लोक महत्व का है तो वे निर्देश दे सकेंगे कि उसको उस दिन की प्रश्न सूची में प्राथमिकता देकर पृथक नत्थी के रूप में रखा जाये जिस दिन नियम के अनुसार तारांकित प्रश्न रूप में उत्तर के लिये उसकी बारी हैः-

                        परन्तु ऐसे प्रथामिकता प्राप्त प्रश्नों की संख्या उस दिन की कार्य सूची में तीन से अधिक न होगी और एक सदस्य का एक से अधिक प्रश्न नहीं रखा जायेगा।

(५)     जब दो या दो से अधिक सदस्य एक ही विषय पर अल्पसूचित प्रश्न दें और एक सदस्य का प्रश्न अल्पसूचना पर उत्तर के लिये हो जाये, तो अन्य सदस्यों के नाम भी उस सदस्य के नाम के साथ रख दिये जायेंगे, जिसका प्रश्न उत्तर के लिये ग्राह्य कर लिया गया होः-

                        परन्तु अध्यक्ष यह निर्देश दे सकेंगे कि सब सूचनाओं को एक ही सूचना में समेकित कर दिया जाय यदि उनकी राय में एक ही स्वयं पूर्ण ऐसा प्रश्न तैयार करना वांछनीय हो, जिनमें सदस्यों द्वारा बताई गयी सब महत्वपूर्ण बातें आ जायें और तब मंत्री उसमें समेकित प्रश्न का उत्तर देंगेः

                        किन्तु समेकित प्रश्न की अवस्था में सभी संबंधित सदस्यों के नाम साथ-साथ दिये जा सकेंगे और उनकी सूचना की प्राथमिकता के क्रम से प्रश्न के सामने दिखाये जा सकेंगे।

३०-तारांकित तथा अतारांकित प्रश्नों की सूचना-

(1)      तारांकित और अतारांकित प्रश्नों की लिखित सूचना सदस्य द्वारा प्रमुख सचिव को कम से कम पूरे २० दिन पूर्व दी जायेगी।

(2)      ऐसे प्रश्न प्रमुख सचिव द्वारा शासन को साधारणता ५ दिन के भीतर भेज दिये जायेंगेः

                        परन्तु जब तक अध्यक्ष अन्यथा विनिश्चय न करें कोई प्रश्न उत्तर के लिये प्रश्न-सूची में तब तक नहीं रखा जायेगा जब तक कि मंत्री या संबंधित विभाग को ऐसे प्रश्न की सूचना देने के दिनांक से १५ दिन समाप्त न हो जायः

                        परन्तु यह भी कि यदि अध्यक्ष की यह राय हो कि प्रश्न की ग्राह्यता अथवा अग्राह्यता का विनिश्चय करने के लिये अधिक समय की आवश्यकता है तो वह प्रश्न उत्तर के लिये कार्य-सूची में उस दिन के बाद किसी दिन रखा जायेगा जिस दिन वह नियमों के अधीन नियत किया जाता।

(3)     नियम २९ के उप नियम (५) के उपबन्ध तारांकित तथा अतारांकित प्रश्नों की सूचनाओं की दशा में भी प्रवृत्त होंगे।

३१-प्रश्नों के लिये समय-

जब तक अध्यक्ष अन्यथा निर्देश न दें,प्रत्येक उपवेशन का पहला एक घण्टा और बीस मिनट का समय प्रश्नों के पूछने और उनका उत्तर देने के लिये उपलब्ध रहेगा जिसमें:-

(1)       सवर्प्रथम अल्पसूचित प्रश्न लिये जायेंगे,

(2)       तदुपरान्त नियम २९ (४) के अन्तर्गत प्राथमिकता प्राप्त प्रश्न लिये जायेंगे,

(3)       तदुपरान्त तारांकित प्रश्न लिये जायेंगे तथा

(4)       अन्त में अतारांकित प्रश्न लिये गये समझे जायेंगे।

३२-उत्तरों की प्रतियां सदस्य को उपलब्ध करना तथा सदन में प्रश्नोत्तर का निस्तारण-

(१)      प्रश्नों के उत्तर के लिये जो दिन नियत किया गया हो, उस दिन का उपवेशन आरम्भ होने के एक दिन पूर्व प्रश्न के लिखित उत्तरों की प्रति सम्बद्ध सदस्य को उपलब्ध कर दी जायेगी।

(२)      अल्पसूचित प्रश्नों और तारांकित प्रश्नों के उत्तर सम्बद्ध मंत्री द्वारा पढ़कर सुनाये जायेंगे तथा कार्य-सूची में सम्मिलित ऐसे समस्त अतारांकित प्रश्नों के, जो स्थगित न किये गये हों, उत्तरों को सभा पटल पर रखा गया समझा जायेगा और ऐसे अतारांकित प्रश्न तथा उनके लिखित उत्तर उस दिन की कार्यवाही के अंश के रूप में प्रकाशित किये जायेंगे।

३३-प्रश्नों की संख्या की परिसीमा-

(१) एक सदस्य एक दिन में केवल पांच प्रश्नों की ही सूचना दे सकेगा जिसमें अल्पसूचित तारांकित प्रश्न, तारांकित प्रश्न तथा अतारांकित प्रश्न सम्मिलित हैं। यदि कोई सदस्य पांच प्रश्नों से अधिक सूचना किसी दिन देता है तो उसकी प्रथम पांच सूचनाएं ली जा सकेंगी और शेष सूचना अस्वीकृत समझी जायेंगी।

(२) मौखिक उत्तर के लिये किसी एक दिन की प्रश्न सूची में तारांक लगाकर विभेद किये गये २० से अधिक प्रश्न नहीं रखे जायेंगे तथा एक सदस्य का एक से अधिक तारांकित प्रश्न नहीं रखा जायेगा। सदस्यों के किसी एक दिन के लिए निर्धारित एक से अधिक तारांकित प्रश्न अतारांकित प्रश्नों की सूची में रख दिये जायेंगेः

                                परन्तु किसी एक दिन के लिए निर्धारित अतारांकित प्रश्नों की कुल संख्या सामान्यतया २०० से अधिक न होगी।

३४- प्रश्नों के मौखिक उत्तरों के लिए दिन नियत करना-

प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपलब्ध समय सम्बद्ध मंत्री अथवा मंत्रियों से सम्बद्ध प्रश्नों के उत्तर देने के लिए भिन्न-भिन्न दिनों में चक्रानुक्रम से उस प्रकार नियत किया जायेगा जैसा कि अध्यक्ष समय-समय पर उपबन्धित करें। प्रत्येक ऐसे दिन जब तक अध्यक्ष सम्बद्ध मंत्री की सम्मति से अन्यथा निर्देश न दें, केवल ऐसे मंत्री अथवा मंत्रियों से सम्बद्ध प्रश्न ही, जिनके लिये उस दिन समय नियत किया गया हो, उत्तर के लिए प्रश्न- सूची में रखे जायेंगे। यह नियम अल्पसूचित प्रश्नों के सम्बन्ध में प्रवृत्त न होगा।

३५- मंत्री की अनुपस्थिति के कारण प्रश्न का स्थगन-

विशेष अथवा अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण सम्बद्ध मंत्री की अनुपस्थिति की दशा में तदविषयक प्रार्थना किये जाने पर अध्यक्ष प्रश्न को किसी आगामी दिन के लिये स्थगित कर सकेंगे।

३६- प्रश्न पूछने की रीति-

प्रश्नों के घंटे में अध्यक्ष उन सदस्यों को जिनके नाम में प्रश्न सूची-बद्ध किये गये हों क्रमानुसार तथा प्रश्नों की प्राथमिकता का यथोचित ध्यान रखते हुए अथवा ऐसी अन्य रीति से पुकारेंगे जिसको अध्यक्ष स्वविवेक से विनिश्चित करें और ऐसे सदस्य पुकारे जाने पर अपनी उपस्थित दर्शाने के लिए अपने स्थान पर खड़े होंगे। यदि वह सदस्य जो पुकारे गये हों अनुपस्थित हों तो अध्यक्ष आगामी प्रश्न को ले लेंगे।

३७- प्रश्नों की सूचना देने की रीति-

प्रश्न विभागीय मंत्री को सम्बोधित होंगे और प्रमुख सचिव को उनकी लिखित सूचना दी जायेगी।

व्याख्या- एक दिन प्राप्त हुए प्रश्न उसी दिन के समझे जायेंगे, चाहे प्रश्नकर्ता ने उस पर विभिन्न दिनांक अंकित कर दिये हों।

३८- प्रश्नों के उत्तर देने के ढंग-

(१)      प्रश्नों के उत्तर प्रश्नों के विषय से सुसंगत होंगे और अध्यक्ष यह विनिश्चित करें तो वे सभा के पटल पर विवरण रखने के रूप में हो सकेंगे।

(२)      किसी प्रश्न का उत्तर उस तिथि को दिया जायेगा जिसके लिए वह सूची-बद्ध किया गया हो। यदि सदस्य द्वारा अपेक्षित सूचना उपलब्ध न हो तो मंत्री तदनुसार स्थिति बतायेंगे और अध्यक्ष इतना अधिक समय, जिसे वे परिस्थितियों को देखते हुए उपयुक्त समझें दे सकेंगे तथा उत्तर के लिए कोई तिथि नियत करेंगे।

(३)     यदि मंत्री की यह राय हो कि सदस्य द्वारा अपेक्षित सूचना लोक-हित में नहीं दी जा सकती तो वे ऐसा कहेंगे। इस आधार पर मंत्री की सूचना देने से इन्कार करना विशेषाधिकार का विषय नहीं बनाया जा सकता और न इस आधार पर सदन के स्थगन का प्रस्ताव ही लाया जा सकता है।

३९- अनुपस्थित सदस्यों के प्रश्न-

जब समस्त प्रश्न जिनका मौखिक उत्तर अभिप्रेत है, पुकारे जा चुके हैं, तब अध्यक्ष, यदि समय हो, किसी प्रश्न को पुनः पुकार सकेंगे जो उस सदस्य की अनुपस्थिति के कारण न पूछा गया हो जिसके नाम में वह प्रश्न हो तथा अध्यक्ष किसी सदस्य को अन्य किसी सदस्य के नाम में रखे हुए प्रश्न को पूछने की अनुज्ञा दे सकेंगे यदि वे उनके द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किये गये हों या यदि अन्य कोई सदस्य उस प्रश्न में अभिरुचि रखते हों।

४०- प्रश्नों की वापसी अथवा उसका स्थगन-

कोई भी सदस्य उस उपवेशन के पूर्व जिसके लिए उनका प्रश्न सूची-बद्ध किया गया हो, सूचना देकर अध्यक्ष की सहमति से किसी भी समय अपने प्रश्न को वापस ले सकेंगे अथवा सूचना में निर्दिष्ट किसी आगामी दिन के लिए उसको स्थगित करने की प्रार्थना कर सकेंगे और नियम ३४ के उपबन्धों के अधीन ऐसे आगामी दिन के लिए रखा गया प्रश्न उस दिन के निर्दिष्ट प्रश्नों की सूची के अन्त में रखा जायेगा।

४१-मौखिक उत्तर न दिये जाने वाले प्रश्नों का लिखित उत्तर-

यदि उत्तर के लिए किसी तिथि को निर्धारित कोई अल्पसूचित अथवा तारांकित प्रश्न किसी कारण से उक्त तिथि को सदन में न लिया जा सके तो उसका उत्तर दिया हुआ माना जायेगा और ऐसे समस्त प्रश्नों के लिखित उत्तर उस दिन की कार्यवाही के अंश के रूप में प्रकाशित किये जायेंगे।

४२- अनुपूरक प्रश्न-

(१) नियम ३१ के अन्तर्गत प्रश्नों के समय में किसी प्रश्न अथवा उत्तर के संबंध में चर्चा करने की अनुज्ञा नहीं होगी।

(२) अध्यक्ष की अनुज्ञा से सदस्य प्रश्नाधीन विषय संबंधी तथ्यों पर अग्रेतर स्पष्टीकरण हेतु अनुपूरक प्रश्न पूछ सकेंगेः

                                परन्तु अध्यक्ष कोई ऐसा अनुपूरक प्रश्न अस्वीकार करेंगे, यदि उनकी राय में उससे प्रश्नों संबंधी नियम भंग होते हैं।

४३- अध्यक्ष से प्रश्न-

अध्यक्ष से प्रश्न व्यक्तिगत सूचना द्वारा किये जायेंगे। ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखित रूप से अथवा अध्यक्ष के निजी कमरे में दिया जा सकेगा।

४४- असरकारी सदस्यों से प्रश्न-

प्रश्न एक सदस्य द्वारा किसी दूसरे असरकारी सदस्य को संबोधित किया जा सकेगा यदि प्रश्न का विषय किसी विधेयक, संकल्प अथवा सदन के कार्य के अन्य विषय से सम्बद्ध हो जिसके लिए वे सदस्य उत्तरदायी हैं और ऐसे प्रश्नों के संबंध में यथा सम्भव उसी प्रक्रिया का, जो किसी मंत्री से पूछे गये प्रश्नों के संबंध में प्रयोग की जाती है,ऐसे परिवर्तनों के साथ अनुसरण किया जायेगा जिन्हें अध्यक्ष आवश्यक अथवा सुविधाजनक समझें।

४५- अध्यक्ष प्रश्नों की ग्राह्यता का विनिश्चय करेंगे-

अध्यक्ष प्रश्न की ग्राह्यता का विनिश्चय करेंगे और वे किसी प्रश्न को अथवा उसके किसी भाग को अस्वीकार कर सकेंगे जो उनकी राय में इन नियमों के प्रतिकूल है अथवा प्रश्न पूछने के अधिकार का दुरुपयोग है। अध्यक्ष सम्बद्ध सदस्य को संक्षेप में प्रश्न को अग्राह्य करने के कारणों की सूचना देंगे। वे किसी प्रश्न को नियमानुकूल बनाने के लिए उसमें संशोधन कर सकेंगे अथवा प्रश्न को सुधार के निमित्त वापस कर सकेंगे।

४६- प्रश्न के वर्ग में परिवर्तन करने की अध्यक्ष की शक्ति-

अध्यक्ष किसी अल्पसूचित प्रश्न को तारांकित या अतारांकित प्रश्न में तथा किसी तारांकित प्रश्न को अतारांकित प्रश्न में परिवर्तित कर सकेंगेः

                                परन्तु अध्यक्ष यदि उचित समझें तो तारांकित प्रश्न की सूचना देने वाले सदस्य से अपने प्रश्न को इस वर्ग में रखने का कारण संक्षिप्त रूप से बताने के लिए कह सकेंगे और उस पर विचार करने के उपरान्त अध्यक्ष निर्देश दे सकेंगे कि प्रश्न को उस वर्ग में रखा जाय।

४७- किसी दिन के लिए प्रश्नों की सूची-

(१) अध्यक्ष द्वारा ग्राह्य प्रश्नों में से प्राप्ति के क्रमानुसार प्रथम २० सदस्यों के एक-एक तारांकित प्रश्न निर्धारित दिन के प्रश्नों की कार्य-सूची में रखे जायेंगे और उसी क्रम से पुकारे जायेंगे जिस प्रकार वे सूची में दिये हों। उक्त दिन के लिए निर्धारित शेष तारांकित प्रश्न अतारांकित प्रश्नों की सूची में रख दिये जायेंगे।

(२) प्रमुख सचिव प्रत्येक कार्य दिवस के लिए निर्धारित प्रश्नों की एक अस्थायी सूची बनायेंगे तथा उस दिनांक से साधारणतया एक सप्ताह के पूर्व उसकी प्रतिलिपियां सब सदस्यों को भेज देंगे। यदि उस दिन सदन का उपवेशन हो रहा हो तो वह सदस्यों को प्रतिलिपियां भेजने के बदले उन्हें सदस्यों की मेजों पर रखेंगे।

४८-प्रश्नोत्तरों का सभा की कार्यवाहियों में समावेश-

प्रश्न जो पूछे जायं तथा जिनके उत्तर दिये जायं उन सबका सभा की कार्यवाही में समावेश होगाः

                                परन्तु किसी प्रश्न को जो अस्वीकार किया गया हो इस प्रकार समावेश नहीं हो सकेगा।

४९-प्रश्नोत्तरों से उत्पन्न होने वाले विषयों पर चर्चा- 

(१) अध्यक्ष किसी ऐसे पर्याप्त लोक महत्व के विषय पर जो सदन में हाल में प्रश्ननोत्तर का विषय रहा हो, चर्चा करने के लिए आधे घण्टे का समय नियत कर सकेंगे।

(२) जब तक अध्यक्ष अन्यथा निर्देश न दें यह नियतन साधारणतया सदन के उपवेशन के दौरान किसी मंगलवार या बृहस्पतिवार के लिए सामान्य कार्य की समाप्ति के उपरान्त किया जायेगा।

(३) कोई सदस्य जो ऐसा विषय उठाना चाहते हों, उस दिन से, जिस दिन वे उस विषय को उठाना चाहते हों, तीन दिन पूर्व प्रमुख सचिव को उसकी लिखित सूचना भेजेंगे और इस विषय या उन विषयों का, जिनको वे उठाना चाहते हों, संक्षेप में उल्लेख करेंगेः

                                परन्तु सूचना के साथ व्याख्यात्मक टिप्पणी होगी जिसमें सम्बद्ध विषयों पर चर्चा उठाने के कारण बताये जायेंगेः

                                किन्तु अध्यक्ष सम्बद्ध मंत्री की सम्मत्ति से सूचना की अवधि संबंधी अपेक्षा को हटा सकेंगे।

(४) यदि आवश्यक हो तो एक ही उपवेशन में दो सूचनायें ली जा सकेंगी। यदि दो से अधिक सूचनायें प्राप्त हुई हों और अध्यक्ष ने उनको स्वीकार कर लिया हो तो अध्यक्ष यह विनिश्चित करेंगे कि उनमें से कौन सी दो ली जायं:

                                परन्तु यदि कोई विषय जो किसी विशेष दिन के लिए चर्चार्थ रखा गया हो यदि उस दिन निस्तीर्ण न हो सके तो वह अन्य किसी दिन तब तक नहीं रखा जायेगा जब तक कि अध्यक्ष अन्यथा निर्देश न दें।

(५) सदन के समक्ष कोई औपचारिक प्रस्ताव न होगा और न मत लिए जायेंगे। जिस सदस्य ने सूचना दी हो वह एक संक्षिप्त वक्तव्य द्वारा उस विषय का पुरःस्थापन करेंगे। सम्बद्ध मंत्री संक्षेप में उत्तर देंगे। तत्पश्चात् अध्यक्ष अन्य सदस्यों को किसी तथ्य विषय के अतिरिक्त स्पष्टीकरण के प्रयोजन से प्रश्न पूछने की अनुज्ञा दे सकेंगे। विषय पुरःस्थापित करने वाले सदस्य को उत्तर देने के लिए दूसरी बार बोलने की अनुज्ञा दी जा सकेगी और सम्बद्ध मंत्री के अन्तिम कथन होने पर चर्चा समाप्त हो जायेगी।

५०- प्रश्नों और उत्तरों के    पूर्व प्रकाशन का प्रतिषेध-

प्रश्न जिनकी सदस्यों ने सूचना दी हो, और उनके उत्तर जो मंत्री सदन में देना चाहते हों, तब तक प्रकाशनार्थ नहीं दिये जायेंगे जब तक कि सदन में प्रश्न न ले लिये जायं और उनके उत्तर न दे दिये जायं या पटल पर न रख दिये जायं।

 

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