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Vidhan Sabha
अध्याय 4 सभा के उपवेशन

१४­-सभा के अधिवेशन-

अनुच्छेद-१७४ के अधीन रहते हुए साधाणतया प्रत्येक वर्ष में सभा के ३ अधिवेशन अर्थात् आय-व्ययक अधिवेशन, वर्षाकालीन अधिवेशन व शीतकालीन अधिवेशन और ९० दिन के उपवेशन होंगे जिसमें यथासंभव दो माह के अन्तराल पर कम से कम दस कार्यकारी दिवसों के लिये विधान सभा का सत्र बुलाया जायेगा।

   अनु0 174

१४­-क सभा के उपवेशन-

(१) सत्र के आरम्भ होने के पश्चात् सभा उन दिनों बैठेगी जिनको अध्यक्ष सभा के कार्य की स्थिति को देखकर तथा सदन के नेता के परामर्श से समय-समय पर निश्चित करें।

(२) सदन का उपवेशन तभी विधिवत गठित होगा जबकि उसमें अध्यक्ष अथवा कोई अन्य सदस्य पीठासीन हो जो संविधान या इन नियमों के अन्तर्गत सदन के उपवेशन में पीठासीन होने के लिए सक्षम हों।

१५­-उपवेशन का समय-

(१) अध्यक्ष के निर्देश के अधीन रहते हुये सभा का उपवेशन साधारणतया ११ बजे पूर्वाहन से प्रारम्भ होगा और तब तक चलेगा जब तक उस दिन के लिए निर्धारित कार्य समाप्त न हो जायः

                                       परन्तु यदि अध्यक्ष ऐसा करना उचित समझें या ऐसा करना किन्हीं परिस्थितियोंवश आवश्यक हो जाय तो निर्धारित कार्य समाप्त होने से पूर्व भी उपवेशन स्थगित किया जा सकता है।

            

(२) जब तक कि सदन अन्यथा निश्चय न करे, शनिवार, रविवार तथा अन्य सार्वजनिक छुटि्टयों के दिन कोई उपवेशन नहीं होगा।

१६-गणपूर्ति-

सभा के उपवेशन को गठित करने के लिए गणपूर्ति सदन के सब सदस्यों की संख्या का दशमांश होगा।

अनु0 189(3)

१७-उपवेशनों का स्थगन-

अध्यक्ष स्वयं अथवा सभा के तदविषयक प्रस्ताव पर, सभा के उपवेशन को स्थगित कर सकेंगेः

                                किन्तु यदि सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो तो सभा के पुनः समवेत होने की तिथि की सूचना सदस्यों को साधारणतया दस दिन पूर्व दी जायेगीः

                                परन्तु अध्यक्ष सभा के उपवेशन को उस तिथि के पूर्व अथवा उसके बाद की तिथि को बुला सकेंगे जिस तिथि के लिए वह स्थगित हुआ हो।

१८- सत्रावसान का प्रभाव-

जब सभा सत्रावसित हो जाय तो-

(क) सभी लम्बित सूचनायें, वक्तव्य और चर्चायें व्यपगत हो जायेंगी और आगामी सत्र के लिए फिर से सूचनायें दी जायेंगीः

                                परन्तु जो प्रश्न कार्य-सूची में प्रविष्ट हो चुके हों, किन्तु पिछले सत्र की समाप्ति पर स्थागित किये गये हों और उत्तर के लिए लम्बित हों, वे व्यपगत नहीं होंगे;

(ख) सत्रावसान के समय जो विधेयक सदन में लम्बित हों, वह सदन के सत्रावसान के कारण व्यपगत नहीं होगा;

(ग) किसी समिति के समक्ष लम्बित कोई कार्य व्यपगत नहीं होगा;

(घ) ऐसा कोई प्रस्ताव, संकल्प अथवा संशोधन जो उपस्थित किया जा चुका हो और सदन में लम्बित हो, व्यपगत नहीं होगा।

     

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