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Vidhan Sabha
अध्याय १९ सदन के स्थानों का त्याग और उनकी रिक्तता तथा अनुपस्थित सदस्य
 

२७९- सदन के स्थानों का त्याग-

(१) जो सदस्य सदन में अपने स्थान का त्याग करना चाहें, वे निम्नलिखित प्रपत्र में ऐसी सूचना देंगे-

सेवा में

        अध्यक्ष,

        विधान सभा,

        उत्तर प्रदेश।

 श्रीमान्,

        मैं एतद्द्वारा सदन से अपने स्थान से .............................................(दिनांक) पूर्वाहन/अपराहन से पद त्याग करता हूं।

आपका विश्वासपात्र,

(विधान सभा के सदस्य के हस्ताक्षर)

 स्थान.....................................तिथि..........................................

टिप्पणी-(१) पत्र में दिये हुए पद त्याग के दिनांक और समय उस समय से पूर्व के नहीं होंगे जबकि वह पत्र लिखा गया है।

(२) यदि कोई सदस्य अपना त्याग-पत्र अध्यक्ष को स्वयं व्यक्तिगत रूप से देते हैं और उनको सूचित करते हैं कि त्याग-पत्र स्वेच्छा से दिया गया है और जैन्य है और अध्यक्ष के पास कोई विपरीत सूचना या जानकारी नहीं है तो अध्यक्ष त्याग-पत्र को तत्काल स्वीकार कर सकेंगे।

(३) यदि अध्यक्ष को त्याग-पत्र डाक द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से मिले तो अध्यक्ष, त्याग-पत्र की स्वेच्छात्मक प्रकृति तथा जैन्यता के बारे में अपना समाधान करने के लिए ऐसी जांच कर सकेंगे जिसे वे उचित समझें। यदि अध्यक्ष द्वारा या तो स्वयं या विधान सभा सचिवालय के माध्यम से या ऐसे अन्य माध्यम से जिसे वे उचित समझें, संक्षिप्त जांच के उपरान्त अध्यक्ष का यह समाधान हो जाय कि त्याग-पत्र स्वेच्छा से नहीं दिया गया है या जैन्य नहीं है तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

(४) कोई सदस्य अपने त्याग-पत्र को अध्यक्ष द्वारा स्वीकृत किये जाने से पूर्व वापस ले सकेंगे।

(५) किसी सदस्य का त्याग-पत्र स्वीकार करने के उपरान्त अध्यक्ष शीध्र सदन को सूचना देंगे कि अमुक-अमुक सदस्य ने सदन के अपने स्थान का त्याग कर दिया है और उन्होंने त्याग-पत्र स्वीकार कर लिया है।

स्पष्टीकरण- जब सदन सत्र में न हो तो अध्यक्ष सदन के पुनः समवेत होने के बाद तुरन्त सदन को सूचना देंगे।

(६) प्रमुख सचिव, अध्यक्ष द्वारा किसी सदस्य के त्याग-पत्र को स्वीकार कर लिए जाने के उपरान्त यथाशीध्र यह जानकारी बुलेटिन तथा गजट में प्रकाशित करायेंगे और अधिसूचना की एक प्रति निर्वाचन आयोग को इस प्रकार हुई रिक्तता की पूर्ति हेतु कार्यवाही करने के लिए भेजेंगे। परन्तु यदि त्याग-पत्र किसी आगामी तिथि से प्रभावी होने वाला हो तो उसकी जानकारी बुलेटिन तथा गजट में उस दिनांक से पूर्व प्रकाशित नहीं की जायेगी जिस दिनांक से उसे प्रभावी होना है।

(७) त्याग-पत्र में निर्दिष्ट दिनांक एवं समय से पद त्याग प्रभावी होगा।

(८) यदि त्याग-पत्र की जैन्यता अथवा स्वेच्छात्मक प्रकृति के विषय में कोई विवाद उत्पन्न हो तो उप नियम (५) अथवा उप नियम (६) के अन्तर्गत कार्यवाही करने से पूर्व उसका निर्णय अध्यक्ष द्वारा किया जायगा।

(९) यदि कोई त्याग-पत्र विहित प्रपत्र में न हो तो वह सम्बद्ध सदस्य को विहित प्रपत्र में प्रस्तुत करने हेतु वापस कर दिया जायेगा।

२८०- सदन के उपवेशनों से अनुपस्थित रहने के लिए अनुज्ञा-

(१) जो सदस्य अनुच्छेद १९० के खण्ड (४) के अन्तर्गत सदन के उपवेशनों में अनुपस्थिति की अनुज्ञा प्राप्त करना चाहें, वह अध्यक्ष को लिखित रूप में आवेदन-पत्र देंगे, जिसमें उस कालावधि का उल्लेख करेंगे जिसके लिए उन्हें सदन के उपवेशनों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा दी जाय।

(२) ऐसा आवेदन-पत्र प्राप्त होने के पश्चात् शीध्र ही जैसा कि अध्यक्ष आदेश दें, सदन के विचारार्थ रखा जायेगा और इस प्रकार नियत दिवस में प्रश्नों के अनन्तर तत्काल तथा उस दिन का अन्य कार्य आरम्भ होने के पूर्व उस पर विचार किया जायगा।

(३) अध्यक्ष, उस ढंग को निश्चित करेंगे, जिसके अनुसार ऐसे आवेदन-पत्रों पर, सभा का विनिश्चय लिया जायेगा।

(४) प्रमुख सचिव, सदस्य को उनके आवेदन-पत्र पर सभा के विनिश्चय की यथाशीध्र सूचना देंगे।

(५) यदि कोई सदस्य जिन्हें उप नियम (२) के अन्तर्गत अनुपस्थिति की अनुमति प्रदान की गयी हो अवकाश की कालावधि के दौरान में सदन के सत्र में उपस्थित हो जायं तो उनकी पुनः उपस्थिति की तिथि से अवकाश का असमाप्त भाग व्यपगत हो जायेगा।

(६) यदि कोई सदस्य ६० दिन की कालावधि या उससे अधिक समय तक सदन की अनुज्ञा के बिना उसके सब उपवेशनों से, जिसकी संगणना अनुच्छेद १९०(४) के परन्तुक में उपबद्ध रीति से की जायेगी, अनुपस्थिति रहे तो सदन-नेता या कोई भी अन्य सदस्य प्रस्ताव कर सकेंगे कि ऐसे सदस्य का स्थान रिक्त घोषित कर दिया जाय।

(७) सदस्य ऐसे प्रस्ताव की तीन दिन की सूचना देंगे और अपनी सूचना के साथ उन तिथियों का एक पूर्ण विवरण भेजेंगे जिसमें वह सदस्य अनुपस्थित थे।

(८) उप नियम (६) के अन्तर्गत प्रस्ताव स्वीकार हो जाने के बाद प्रमुख सचिव यह जानकारी गजट में प्रकाशित करायेंगे और अधिसूचना की एक प्रति निर्वाचन आयोग को इस प्रकार हुई रिक्तता की पूर्ति हेतु कार्यवाही करने के लिए भेजेंगे।

२८१- उपस्थिति पंजी-

प्रमुख सचिव, सभा के उपवेशनों में सदस्यों की उपस्थिति का अभिलेख रखेंगे और इस प्रयोजन के लिए एक उपस्थिति पंजी रखी जायेगी। यह उपवेशन के प्रारम्भ से एक घंटे पूर्व सभा कक्षों में रखी जायेगी और अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मंत्री, नेता विरोधी दल, राज्य मंत्री, उप मंत्री तथा सभा सचिवों के अतिरिक्त अन्य सदस्य उसमें उपवेशन के दिन के लिए स्थगित होने के पूर्व हस्ताक्षर करेंगे। जो सदस्य पंजी में हस्ताक्षर नहीं करेंगे अनुपस्थित समझे जायेंगे :

                परन्तु जो सदस्य इस प्रकार अनुपस्थित समझे जायं वह सदस्य उपवेशन के १५ दिन के भीतर जिसमें वे उपस्थित थे, किन्तु हस्ताक्षर नहीं कर सके थे, अध्यक्ष को अपनी उपस्थिति का समाधान कर सकेंगे और यदि अध्यक्ष का समाधान हो जाय तो वे आदेश दे सकेंगे कि उनकी उपस्थित अंकित किया जाय।

 

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