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Vidhan Sabha
अध्याय 12 संकल्प

८५- असरकारी सदस्यों द्वारा संकल्पों की सूचना-

जो असरकारी सदस्य कोई संकल्प प्रस्तुत करना चाहें तो वे प्रमुख सचिव को अपने इस मन्तव्य की लिखित सूचना कम से कम १५ दिन पहले देंगे और सूचना के साथ उस संकल्प की एक प्रति भेजेंगे जिसे वे प्रस्तुत करना चाहते हैं।

८६- शासन द्वारा संकल्प की सूचना-

यदि मंत्री कोई संकल्प उपस्थित करना चाहें तो वे सात दिन की सूचना देंगें और उसके साथ संकल्प की एक प्रति प्रमुख सचिव को भेजेंगे जो साधारणतया उसकी प्राप्ति के अड़तालिस घंटों के भीतर उसकी प्रतिलिपियां सदस्यों को भिजवायेंगेः

                                                परन्तु अध्यक्ष इससे कम समय की सूचना स्वीकार कर सकेंगे।

८७- संकल्प का वाद विषय-

इन नियमों के उपबन्धों के अधीन कोई सदस्य अथवा मंत्री सामान्य लोक हित के किसी विषय के संबंध में संकल्प प्रस्तुत कर सकेंगे।

८८- संकल्प का रूप-

संकल्प राय की घोषणा अथवा सिफारिश के रूप में हो सकेगा या ऐसे रूप में हो सकेगा जिससे कि शासन के किसी कार्य अथवा नीति का सदन द्वारा अनुमोदन या अननुमोदन अभिलिखित किया जाय या कोई संदेश दिया जाय या किसी कार्यवाही के लिए संस्तवन, अनुरोध अथवा प्रार्थना की जाय या किसी विषय अथवा स्थिति पर शासन के विचारार्थ ध्यान आकृष्ट किया जाय या किसी ऐसे अन्य रूप में हो सकेगा जो अध्यक्ष उचित समझें।

८९- संकल्प की ग्राह्यता की शर्ते-

किसी संकल्प के ग्राह्य होने के लिए यह आवश्यक है कि वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करे, अर्थात्-

(१) वह स्पष्टतया और सुतथ्यतः व्यक्त किया जायेगा,

(२) उससे सारतः एक ही निश्चित वाद-विषय उठाया जायेगा,

(३) उसमें प्रतर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक पद, लांछन या मान-हानिकारक कथन नहीं होंगे,

(४) उसमें व्यक्तियों की सरकारी या सार्वजनिक हैसियत के अतिरिक्त उनके आचरण या चरित्र का निर्देश नहीं होगा, तथा

(५) उसका किसी ऐसे विषय से संबंध नहीं होगा जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय के न्यायनिर्णयन के अन्तर्गत हो।

९०- न्यायाधिकरण अथवा संविहित प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित विषय पर चर्चा उठाना-

ऐसे संकल्प को प्रस्तुत करने की अनुज्ञा नहीं दी जायेगी जो किसी ऐसे विषय पर चर्चा उठाने के लिए हो जो किसी न्यायिक या अर्द्ध न्यायिक कृत्य करने वाले किसी संविहित न्यायाधिकरण या संविहित प्राधिकारी के या किसी विषय की जांच या अनुसंधान करने के लिए नियुक्त किसी आयोग या जांच न्यायालय के सामने लम्बित  हों:

                                परन्तु यदि अध्यक्ष का समाधान हो जाय कि इससे न्यायाधिकरण, आयोग या जांच न्यायालय द्वारा उस विषय के बारे में विचार किये जाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है तो अध्यक्ष, स्वविवेक से ऐसे विषय को सदन में उठाने की अनुमति दे सकेंगे, जो जांच की प्रक्रिया या व्याप्ति या प्रक्रम से संबंधित हों।

९१- संकल्पों की ग्राह्यता-

अध्यक्ष, संकल्प की ग्राह्यता के बारे में विनिश्चय करेंगे और संकल्प को नियमानुकूल बनाने के लिये स्वविवेक से उसके रूप में परिवर्तन कर सकेंगे। वे किसी संकल्प या उसके किसी भाग को अस्वीकृत कर सकेंगे जो नियमानुकूल न हो अथवा संकल्प प्रस्तुत करने के अधिकार का दुरूपयोग हो अथवा किसी अन्य प्रकार से सदन की प्रक्रिया में बाधा या उस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए आयोजित हो।

९२- असरकारी सदस्य के संकल्प की प्रतिलिपि शासन को भेजा जाना-

असरकारी सदस्य का संकल्प यदि शलाका में स्थान प्राप्त कर ले और अध्यक्ष द्वारा ग्रहीत हो जाय तो उस पर चर्चा के लिए नियत दिनांक से साधारणतया १२ दिन पूर्व उसकी एक प्रतिलिपि शासन को भेजी जायेगी।

९३- संकल्पों का प्रस्तवन तथा वापसी-

(१) कार्य-सूची में जिन सदस्यों के नाम में संकल्प हो वे अथवा कोई दूसरे सदस्य, जिनको उन्होंने अपनी ओर से कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पुकारे जाने पर संकल्प को प्रस्तुत करेंगे और उस दशा में कार्य-सूची में दिए हुए शब्दों में औपचारिक प्रस्ताव के साथ अपना भाषण देंगे अथवा यदि वे संकल्प प्रस्तुत न करना चाहें तो उस दशा में वे अपना कथन उस बात तक ही सीमित रखेंगे:

                                परन्तु अध्यक्ष स्वविवेक से उस सदस्य को संक्षेप में यह वक्तव्य देने की अनुज्ञा दे सकेंगे कि वे संकल्प को क्यों प्रस्तुत करना नहीं चाहते ।

(२) यदि सदस्य पुकारे जाने के समय अनुपस्थित हों तो और उप नियम (१) के अन्तर्गत किसी दूसरे सदस्य को उनकी ओर से कार्य करने के लिए नियमित रूप से प्राधिकृत न किया गया हो तो उनके नाम में अंकित संकल्प व्यपगत हो जायेगा।

९४- संशोधन-

जब कोई संकल्प चर्चाधीन हो तो कोई सदस्य संकल्पों से संबंधित नियमों के अधीन रहते हुए उस संकल्प पर संशोधन प्रस्तुत कर सकेंगे।

९५- संशोधनों की सूचना-

(१) यदि संशोधन की एक प्रति संकल्प पर चर्चा के लिए निश्चित दिन के छत्तीस घंटे पूर्व प्रमुख सचिव को न दी जा चुकी हो तो कोई़ सदस्य उस संशोधन के प्रस्तावित किये जाने पर आपत्ति कर सकेंगे और यह आपत्ति अभिभावी होगी जब तक कि अध्यक्ष संशोधन को प्रस्तावित करने की अनुज्ञा न दे दें।

(२) जिन संशोधनों की सूचना दी गयी हो उनकी सूचियां प्रमुख सचिव, यदि समय हो, तो सदस्यों के लिए समय-समय पर उपलब्ध करेंगे।

९६- भाषणों की समय-सीमा-

किसी भाषण की अवधि अध्यक्ष की अनुज्ञा के बिना पंद्रह मिनट से अधिक नहीं होगीः

                परन्तु संकल्प का प्रस्तावक उसे प्रस्तुत करते समय और सम्बद्ध विभाग का भार-साधक मंत्री, जब वे उस पर पहली बार बोलें,२५ मिनट तक या इससे इतने और अधिक समय तक जिसकी अध्यक्ष अनुज्ञा दें, बोल सकेंगे।

९७- संकल्प की वापसी-

(१) कोई सदस्य, जिन्होंने संकल्प या किसी संकल्प पर संशोधन प्रस्तुत किया हो, सदन की अनुज्ञा के बिना उसे वापस नहीं लेंगे।

(२) वापस लेने की अनुज्ञा मांगने के प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति नहीं दी जायेगी।

९८- संकल्प जिन पर चर्चा नहीं हुई-

यदि किसी संकल्प पर, जिसकी सूचना दी जा चुकी हो और जो कार्य-सूची में प्रविष्ट किया जा चुका हों, उस उपवेशन में चर्चा न हुई हो तो उसको व्यपगत हुआ समझा जायेगा।

९९ -संकल्प का विभाजन-

जब किसी संकल्प पर, जिसमें कई प्रश्न अन्तर्ग्रस्त हों, चर्चा हो चुकी हो, तब अध्यक्ष उस संकल्प को स्व विवेक से विभाजित कर सकेंगे और उसके प्रत्येक या किसी अंश को, जैसा भी वे उचित समझें, पृथक मत के लिए रख सकेंगे।

१००- संकल्प की पुनरावृत्ति-

अन्यथा उपबन्धित अवस्था को छोड़कर यदि कोई संकल्प लम्बित  हो अथवा निस्तीर्ण किया जा चुका हो तो यथास्थिति संकल्प के लम्बनकाल में अथवा उसके निस्तारण की तिथि से ६ महीने के भीतर कोई ऐसा संकल्प या संशोधन प्रस्तुत नहीं किया जायेगा जिसमें सारतः वही वाद विषय या प्रश्न उठाया जाय जो पूर्व संकल्प में अन्तर्निहित  था।

१०१- मंत्री के पास पारित संकल्प की प्रति भेजना-

प्रत्येक संकल्प की, जिसे सदन ने पारित किया हो, एक प्रति सम्बद्ध मंत्री के पास भेजी जायेगी।

१०२- असरकारी सदस्यों के संकल्पों की अग्रेता-

(१) संकल्पों की सूचनाओं की, जो असरकारी सदस्यों ने प्रस्तुत की हो, सापेक्ष अग्रेता का निर्णय अध्यक्ष द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुसार की जाने वाली शलाका द्वारा उस दिवस को होगा जो अध्यक्ष नियत करें।

(२) जब तक अध्यक्ष अन्यथा निर्देशे न दें, असरकारी सदस्यों के संकल्पों के निस्तारण के निमित्त किसी दिन की कार्य-सूची में (नियम २५ के परन्तुक के अन्तर्गत अवशिष्ट किसी संकल्प के अतिरिक्त) पांच से अधिक संकल्प नहीं रखे जायेंगे।

 
 

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