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Vidhan Sabha
अध्याय १० अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय पर कार्य-स्थगन प्रस्ताव

५६- सूचना देने की रीति-

जिस दिन कार्ये-स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करना हो उस दिन का उपवेशन आरम्भ होने के कम से कम एक घंटे पूर्व उसकी द्वि-प्रतिक सूचना प्रमुख सचिव को दी जायेगी। प्रमुख सचिव सूचना की एक प्रति को सम्बद्ध मंत्री के पास भेज देंगे।

५७- प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिये अध्यक्ष की सम्मत्ति की आवश्यकता-

इन नियमों के उपबन्धों के अधीन किसी लोक महत्व के निश्चित अविलम्बनीय विषय पर चर्चा करने के उददेश्य से सदन के कार्य-स्थगन का प्रस्ताव अध्यक्ष की सम्मति से प्रस्तुत किया जा सकेगा।

५८- प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधिकार पर निर्बन्धन-

कार्य-स्थगन प्रस्ताव निम्नलिखित निर्बन्धनों के अधीन ग्राह्य होगा-

(१) एक ही उपवेशन में एक से अधिक प्रस्ताव नहीं किये जायेंगे,

(२) एक ही प्रस्ताव द्वारा एक से अधिक विषय पर चर्चा  नहीं होगी,

(३) प्रस्ताव हाल में ही घटित किसी निर्दिष्ट विषय तक निर्बद्ध रहेगा,

(४) प्रस्ताव द्वारा विशेषाधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जायेगा,

(५) प्रस्ताव द्वारा किसी ऐसे विषय पर पुनः चर्चा नहीं हो सकेगी जिस पर उसी सत्र में चर्चा हो चुकी हो,

(६) प्रस्ताव में कोई ऐसा विषय नहीं लाया जा सकेगा जो पहले से सदन के विचारार्थ निर्धारित किया जा चुका हो, किन्तु इस आधार पर प्रस्ताव को अग्राह्य करने के संवंध में अध्यक्ष इस बात को ध्यान में रखेंगे कि प्रत्याशित विषय पर चर्चा उचित समय के भीतर सदन के समक्ष आने की सम्भावना है, तथा

(७) प्रस्ताव का विषय ऐसा नहीं होगा कि जिस पर कोई संकल्प प्रस्तुत न किया जा सके।

५९-न्यायाधिकरण, आयोग आदि के विचाराधीन विषय पर चर्चा के लिये प्रस्ताव-

ऐसे प्रस्तावों को प्रस्तुत करने की अनुज्ञा नहीं दी जायेगी जो किसी ऐसे विषय पर चर्चा उठाने के लिये हो जो किसी न्यायिक या अर्ध-न्य़ाय़िक कृत्य करने वाले किसी संविहित न्यायाधिकरण या संविहित प्राधिकारी के या किसी विषय की जांच या अनुसंधान करने के लिये नियुक्त किसी आयोग या जांच न्यायालय के सामने लम्बित हो;

                                परन्तु यदि अध्यक्ष का समाधान हो जाय कि इससे न्यायाधिकरण, संविहित प्रधिकारी, आयोग या जांच न्यायालय, द्वारा उस विषय के विचार किये जाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आंशका नहीं है तो अध्यक्ष स्वविवेक से ऐसे विषय को सदन में उठाने की अनुमति दे सकेंगे जो जांच की प्रक्रिया या व्याप्ति या प्रक्रम से संबंधित हो।

६०-कार्य-स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिये अनुज्ञा मांगने की रीति-

(१) यदि अध्यक्ष इस विचार के हों कि प्रस्थापित विषय नियमानुकूल है और नियम ५७ के अन्तर्गत वे अपनी सम्मति दें तो वे सम्बद्ध सदस्य को पुकारेंगे जो अपने स्थान पर खड़े होकर सदन के स्थगित करने का प्रस्ताव उपस्थित करने की अनुज्ञा मांगेंगे।

(२) यदि अनुज्ञा देने पर आपत्ति की जाय तो अध्यक्ष उन सदस्यों से जो अनुज्ञा प्रदान करने के पक्ष में हों अपने स्थानों पर खड़े होने की प्रार्थना करेंगे और यदि तदनुसार कम से कम तात्कालिक सदन के कुल सदस्यों के द्वाद्शांश सदस्य खड़े हो जायें तो अध्यक्ष सूचित करेंगे कि अनुज्ञा प्रदान की गयी। यदि अपेक्षित संख्या से कम सदस्य खड़े हों तो अध्यक्ष सदस्य को सूचित कर देंगे कि उन्हें सदन की अनुज्ञा प्राप्त नहीं है।

६१-प्रस्ताव को लेने का समय-

यदि ऐसा प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुज्ञा प्राप्त हो जाय तो दिन का कार्य समाप्त होने के लिये साधारणतया नियत समय से एक घंटा पूर्व या यदि अध्यक्ष ऐसा निर्देश दें तो ऐसे पूर्व समय पर जबकि दिन का कार्य समाप्त हो जाय उस प्रस्ताव को लिया जायेगा।

६२- चर्चा के समय की परिसीमा-

(१) अविलम्बनीय लोक महत्व के निश्चित विषय पर विचार करने के प्रस्ताव पर चर्चा यदि पहले समाप्त न हो जाय आरम्भ होने से दो घंटे पूरे होने पर आप से आप समाप्त हो जायेगी और उसके पश्चात् कोई प्रश्न नहीं रखा जायेगा।

(२) अध्यक्ष भाषणों के समय को निर्धारित करेंगे।

                                        परन्तु कोई भाषण १५ मिनट से अधिक अवधि का नहीं होगा।

 

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